No.2 या होम — प्राकृतिक अवशोषक चूर्ण 90 ग्राम
थाईलैंड में बना प्राकृतिक अवशोषक चूर्ण। थाई परंपरा में इसे खान-पान के बाद पेट के भारीपन में लिया जाता रहा है। प्रयोग आसान: 1 छोटा चम्मच गुनगुने पानी में घोलें और उसके बाद ख़ूब पानी पिएँ। शुद्ध वज़न 90 ग्राम।
स्टॉक में
पैकेजिंग सहित वज़न (शिपिंग गणना के लिए): 113 g
No.2 या होम — प्राकृतिक अवशोषक चूर्ण
विवरण
- रूप: प्राकृतिक अवशोषक चूर्ण
- शुद्ध वज़न: 90 ग्राम
- निर्माण: थाईलैंड
पारंपरिक उपयोग
- भारी या असामान्य भोजन के बाद पेट की रोज़मर्रा की देखभाल
- यात्रा और खान-पान बदलने के दिनों में
- आँतों की सामान्य दिनचर्या का सहारा
साथ में:
- रोज़मर्रा की सफ़ाई की देखभाल के लिए No.37 रांग जुएद
प्रयोग विधि
1 छोटा चम्मच चूर्ण 100 मिली (आधा गिलास) गुनगुने पानी में घोलें (गुनगुने पानी में जल्दी घुलता है)। उसके बाद ख़ूब पानी पिएँ।
- ज़रूरत के दिनों में: दिन में 6 बार तक (थोड़े दिनों के लिए)
- रोज़मर्रा की देखभाल: दिन में एक बार, सोने से पहले
किन्हें नहीं लेना चाहिए
- गर्भावस्था और स्तनपान
- पेट या आँत में घाव तथा रक्तस्राव की स्थिति
- 1 वर्ष से छोटे शिशु: सलाह नहीं दी जाती
- किसी घटक से एलर्जी: असुविधा होने पर सेवन बंद कर दें
सुरक्षा
- यह आहार अनुपूरक है, औषधि नहीं।
- यदि परेशानी बनी रहे या बढ़े तो चिकित्सक से सलाह लें।
- बच्चों की पहुँच से दूर रखें। बताई गई मात्रा से अधिक न लें।
साथ में देखें
- No.37 रांग जुएद — रोज़मर्रा की सफ़ाई की देखभाल
- No.26 लुक ताई बाई — यकृत की देखभाल
- No.35 या रा बाई — आँतों की सामान्य दिनचर्या
भंडारण
सीधी धूप से दूर 15–30°C पर रखें। ढक्कन कसकर बंद रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- कैसे लें? 1 छोटा चम्मच 100 मिली गुनगुने पानी में घोलकर तुरंत पिएँ, फिर ख़ूब पानी पिएँ।
- कितनी बार ले सकते हैं? ज़रूरत के दिनों में दिन में 6 बार तक (थोड़े दिन); रोज़मर्रा की देखभाल के लिए दिन में एक बार सोने से पहले।
- क्या गर्भावस्था या स्तनपान में ले सकते हैं? नहीं, इन दिनों में इसका सेवन न करें।
- भंडारण कैसे करें? धूप से दूर, 15–30°C पर।
मुख्य सामग्री
Agastache rugosa: कोरियन मिंट, «तिब्बती लोफ़ैंट» — Lamiaceae कुल का शाकीय पौधा। पूर्वी एशिया में पाया जाता है। यह चीनी परंपरा में प्राचीन काल से प्रयुक्त 50 प्रमुख वनस्पतियों में गिना जाता है; चीनी नाम हुओ श्यांग (藿香)।
परंपरा में इसे बलवर्धक माना जाता रहा है और इसे रोज़मर्रा की पाचन तथा सामान्य देखभाल से जोड़ा जाता है। इसकी सुगंधित पत्तियों में वाष्पशील तेल होते हैं।
Aquilaria agallocha roxb: अगरवुड (अगर, कालांबक) — 40 मीटर तक ऊँचा और 60 सेंटीमीटर तक मोटा सदाबहार वृक्ष। मातृभूमि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया। यह भारत, कंबोडिया, मलेशिया, इंडोनेशिया, ब्रुनेई, चीन और म्यांमार में उगता है। दुनिया के सबसे महँगे वृक्षों में से एक; इसकी लकड़ी की धूप घरों में, धार्मिक अनुष्ठानों में और ध्यान के समय जलाई जाती है।
आयुर्वेद में अगर के तेल का उपयोग लंबे समय से होता आया है और इसे वात तथा कफ़ से जोड़ा जाता है। परंपरा में इसे शांति और सुगंध का द्रव्य माना गया है।









