No.5 या मोंग डांग — गरम लाल बाम

पारंपरिक थाई लाल बाम, जिसे लगाने पर सुखद गर्माहट महसूस होती है। थाई मालिश की परंपरा में जोड़ों और मांसपेशियों की रोज़मर्रा की देखभाल के लिए इस्तेमाल होता है। सक्रिय घटक त्वचा में उतरकर गर्माहट का अहसास छोड़ते हैं। केवल बाहरी उपयोग के लिए।

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पैकेजिंग सहित वज़न (शिपिंग गणना के लिए): 230 g

विवरण

90 ग्राम

पारंपरिक उपयोग

  • जोड़ों और मांसपेशियों की रोज़मर्रा की देखभाल (साथ में N16 थाओ एन ऑन)।
  • परिश्रम या व्यायाम के बाद मांसपेशियों की मालिश।
  • ठंडे मौसम में शरीर को गर्माहट देने के लिए।
  • पीठ, कंधों और घुटनों की मालिश (साथ में N38 या नुआद माव)।

किन पर न लगाएँ

कटी, छिली या जलन वाली त्वचा पर न लगाएँ।

प्रयोग विधि

 केवल बाहरी उपयोग! थोड़ी मात्रा लें (मटर के दाने जितना बाम 100 वर्ग सेंटीमीटर से ज़्यादा त्वचा के लिए काफ़ी है) और दिन में 1-3 बार उस जगह पर मालिश करें। बेहतर असर के लिए उस हिस्से को कपड़े से ढक लें। लगाने के बाद हाथ अच्छी तरह धो लें।

सावधानी

आँख, नाक या मुँह में जाने से बचाएँ — इससे हानिरहित पर असुविधाजनक जलन हो सकती है। त्वचा से हटाने के लिए वनस्पति तेल या पोषक क्रीम का उपयोग करें; आँख से हटाने के लिए साफ़ वैसलीन का।

भंडारण

सीधी धूप से दूर, 15 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें।

 

मुख्य सामग्री

स्टिक लैक ऑयल (असली लाल बाम में कम से कम 28%) — लाल रंग का रेज़िन जैसा पदार्थ, जो Kerria lacca नामक लाख कीट का स्राव है। लाख भारत, चीन, लाओस, थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में तैयार होती है।

किसान इन कीटों को एक आधार-वृक्ष (Millettia pinnata, जो स्वयं भी परंपरा में प्रयुक्त है) पर बसाते हैं, जहाँ वे पतली टहनियों पर अपने घर बनाते हैं। कुछ समय बाद कीट आगे बढ़ जाते हैं और जो चिपचिपा पदार्थ (स्टिक लैक) बचता है उसे किसान इकट्ठा करते हैं; सफ़ाई और छँटाई के बाद वह सीडलैक और फिर शेलैक बनता है।

शेलैक: इस पदार्थ का उपयोग लंबे समय से कई कामों में होता आया है — भारत में शृंगार-सामग्री के रूप में, चीन में चमड़े के काम में। दक्षिण-पूर्व एशिया में लाख से रेशम और ऊन रंगे जाते थे, क्योंकि इसका रंग धूप में फीका नहीं पड़ता। आभूषणों में इससे चूड़ियाँ और डिब्बियाँ बनती थीं। जमने पर आकार बनाए रखने के गुण के कारण इससे मुहर लगाई जाती थी।

आज भी लाख से मिलने वाला प्राकृतिक रंग (कार्माइन) जूस, शीतल पेय, चटनी, मुरब्बे और मिठाइयों में इस्तेमाल होता है। महाभारत में भी लाख का उल्लेख मिलता है। भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया की परंपरा में लाख को मलहम और बाम बनाने का आधार माना जाता रहा है।